धनखड़ की फटकार के बाद शिवराज मिले शाह से
किसानों के मुद्दों पर केंद्र और राज्यों की सक्रियता बढ़ी, जल्द हो सकता है बड़ा फैसला
नई दिल्ली। देशभर में एक बार फिर किसान आंदोलन तेज होता नजर आ रहा है। उत्तर प्रदेश के नोएडा में किसानों द्वारा किए गए धरना प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किए गए लगभग 160 प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने रिहा कर दिया। इसके बाद किसान नेताओं ने यमुना एक्सप्रेसवे के जीरो प्वाइंट पर एक पंचायत आयोजित की और धरना प्रदर्शन जारी रखने का निर्णय लिया। ऐसे में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने समझाईश के साथ फटकार लगाई थी, जिसका असर भी देखने को मिला है। इससे राज्य व केंद्र सरकार द्वारा किसानों को लेकर कोई बड़ा फैसला लेने की उम्मीद जागी है।किसानों के बढ़ते असंतोष के बीच केंद्र और राज्य सरकारें सक्रिय हो गई हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर किसानों की मांगों पर चर्चा की है। इससे पहले किसानों के मुद्दे पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का कृषि मंत्री को लेकर दिया गया बयान भी सुर्खियों में रहा है। उन्होंने राज्यसभा में विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा था कि किसानों के मुद्दों का सिर्फ राजनीतिकरण किया जा रहा है और वास्तविक समाधान की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा। वहीं एक कार्यक्रम में धनखड़ ने एक कार्यक्रम के दौरान कृषि मंत्री से सीधे सवाल कर उन्हें फटकार लगाई थी।
यूपी सरकार ने की कमेटी गठित
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने भी किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए 5 सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी भूमि अधिग्रहण और मुआवजे से संबंधित विवादों की जांच करेगी। रिपोर्ट सौंपने की समयसीमा एक महीने तय की गई है।
उपराष्ट्रपति की तीखी टिप्पणी
उपराष्ट्रपति ने हाल ही में एक कार्यक्रम में कृषि मंत्री से सीधे सवाल किए थे। उन्होंने पूछा था कि किसानों से किए गए वादे अब तक क्यों पूरे नहीं हुए और इन वादों को निभाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। किसान नेता अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, जिनमें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी। भूमि अधिग्रहण और मुआवजे से जुड़े विवादों का हल। बिजली और अन्य संसाधनों पर रियायत आदि प्रमुख हैं। सरकार और किसान संगठनों के बीच संवाद भी हुआ है, इससे भी उम्मीद जताई जा रही है कि समस्या का समाधान जल्द ही निकल आएगा। किसान संगठनों का कहना है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

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