मुआवजा घोटाले की पड़ताल में देरी, अधिकारियों पर उठे सवाल
रायपुर: भारतमाला मुआवजा घोटाले में आई दावा-आपत्तियों और शिकायतों की जांच के लिए गठित चार समितियों में से अब तक केवल तीन समितियों ने ही अपनी रिपोर्ट संभागायुक्त महादेव कावरे को सौंपी है। जबकि तय समयसीमा 14 अगस्त को समाप्त हो चुकी है। एक अन्य समिति ने अब तक रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की है, जिससे साफ है कि कमिश्नर के आदेश को गंभीरता से नहीं लिया गया।
संभागायुक्त ने पहले ही स्पष्ट निर्देश दिए थे कि जांच में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके बावजूद कुछ समितियां अब तक फाइलें खंगालने में ही जुटी हैं। सूत्रों के मुताबिक, समीक्षा बैठक में आयुक्त ने नाराजगी जताते हुए सभी समितियों को 15 दिनों का अतिरिक्त समय दिया था, जिसकी अवधि अब समाप्त हो चुकी है।
बता दें कि बीते सप्ताह हुई समीक्षा बैठक में समितियों ने एक हफ्ते की और मोहलत मांगी है। इन समितियों पर था जिम्मा रायपुर जिले के लिए उपायुक्त ज्योति सिंह, अपर कलेक्टर निधि साहू और संयुक्त कलेक्टर उमाशंकर बंदे की अगुवाई में समितियां गठित की गईं। धमतरी जिले के लिए अपर कलेक्टर इंदरा देवहारी की अध्यक्षता में समिति बनाई गई।
इन समितियों को पचेड़ा, भेलवाडीह, कुर्रू, झांकी, बिरोड़ा, टेकारी, उगेतरा, नायकबांधा, पारागांव, मोतियाडीह, सरसदा, अभनपुर, सारंगी, चरौदा, निसदा, गोइंदा, अकोलीकला, भिलाई, सिवनीकला, कुरुद, सिर्री, भरदा समेत प्रभावित गांवों के 100 से ज्यादा दावों की जांच करनी थी। लेकिन अब तक जांच पूरी नहीं हुई है और जांच रिपोर्ट पेश नहीं किया गया है।
खानापूर्ति से आगे नहीं बढ़ीं समितियां
संभागायुक्त ने एक माह में जांच पूरी कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था, लेकिन डेढ़ माह बाद भी समितियों ने महज खानापूर्ति की। अब देखना होगा कि शेष समितियां कब तक अपनी रिपोर्ट संभाग कार्यालय में जमा करती हैं।

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