SBI का बड़ा बयान: डिजिटल भुगतान के लिए भारत को चाहिए देसी UPI प्लेटफॉर्म
व्यापार : डेटा का सही लाभ उठाने के लिए भारत को विदेशी भुगतान प्लेटफार्मों पर निर्भर रहने के बजाय देसी काउंटर इंट्यूटिव यूपीआई एप की जरूरत है। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की एक रिपोर्ट में यह सलाह दी गई है।
यूपीआई पर टीपीएपी का प्रभुत्व
रिपोर्ट में बताया गया है कि देश के यूपीआई पारिस्थितिकी तंत्र पर वर्तमान में कुछ तीसरे पक्ष एप प्रोवाइडर (टीपीएपी) का प्रभुत्व है। इसमें फोनपे, गूगल पे और पेटीएम लेनदेन की मात्रा और मूल्य दोनों में अग्रणी है। इसमें कहा गया है कि जैसे-जैसे हम डेटा का लाभ उठाने की ओर बढ़ रहे हैं, घेरलू प्रमुख यूपीआई एप की जरूरत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
किस एप ने कितना लेनदेन किया दर्ज?
- जूलाई 2025 के आंकड़ों के अनुसार, फोनपे यूपीआई क्षेत्र में स्पष्ट रूप से अग्रणी बनकर उभरा है। इस एप ने 8,931 मिलियन लेनदेन की बड़ी मात्रा और 12,20,141 करोड़ रुपये मूल्य के लेनदेन दर्ज किए हैं।
- गूगल पे 692.3 करोड़ लेनदेन और 8,91,297 करोड़ रुपये के कुल लेनदेन मूल्य के साथ दूसरे स्थान पर रहा।
- पेटीएम 136.6 करोड़ लेनदेन और 1,43,651 करोड़ रुपये मूल्य के साथ तीसरे स्थान पर रहा।
- नवी और सुपर मनी जैसी अन्य कंपनियों ने बहुत कम संख्या में लेनदेन किए।
- नवी ने 23,563 करोड़ रुपये मूल्य के 444 मिलियन लेनदेन संसाधित किए,
- वहीं सुपर.मनी ने 9,019 करोड़ रुपये मूल्य के 253 मिलियन लेनदेन संभाले
घेरलू यूपीआई डेटा सुरक्षा के साथ फिनटेक नवाचार को बढ़ावा देगा
एसबीआई ने सुझाव दिया कि यूपीआई डेटा कुछ बड़े खिलाड़ियों के पास केंद्रित है, और इनमें से अधिकांश प्लेटफार्मों पर मजबूत विदेशी स्वामित्व या प्रभाव है। घरेलू यूपीआई एप न केवल लेनदेन डेटा की सुरक्षा में मदद करेगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगा कि देश में फिनटेक नवाचार भारत की जरूरतों और प्राथमिकताओं के अनुरूप विकसित हो।

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