अश्विनी वैष्णव ने कहा- लालू, ममता और खरगे के समय से अब दुर्घटनाओं में आई गिरावट
लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को अपनी सरकार की कामयाबी गिनाई. उन्होंने अपनी सरकार में रेलवे सुरक्षा में हुए सुधार पर बात की. उन्होंने कहा, रेलवे सुरक्षा में सुधार हुआ है और पिछले वित्तीय वर्ष में रेल दुर्घटनाओं की संख्या घटी है. पिछले वित्तीय वर्ष में रेल दुर्घटनाओं की संख्या 400 थी जो अब घटकर 81 हो गई है.
साथ ही रेल मंत्री वैष्णव ने कहा कि रेलवे सुरक्षा में बहुत अहम सुधार हुए हैं. उन्होंने अपने कार्यकाल में रेल में हुई दुर्घटनाओं की संख्या की तुलना रेल मंत्री रहे लालू यादव, ममता बनर्जी और मल्लिकार्जुन खरगे के कार्यकाल से की. वैष्णव ने कहा, लालू जी के समय में हर साल लगभग 700 दुर्घटनाएं होती थीं, ममता जी के समय में लगभग 400 दुर्घटनाएं होती थीं, खरगे जी के समय में लगभग 385 दुर्घटनाएं होती थीं. हाल ही में वित्तीय वर्ष (2024-25) में यह संख्या 400 से घटकर 81 हो गई है जोकि बहुत महत्वपूर्ण सुधार है.
शून्य एफआईआर के लिए सिस्टम
रेलवे से संबंधित अपराधों के लिए एफआईआर दर्ज करने में देरी के मामलों के बारे में उन से एक सवाल किया गया. इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, प्रत्येक राज्य की जीआरपी (सरकारी रेलवे पुलिस) और आरपीएफ (रेलवे सुरक्षा बल) लगातार चर्चा करते हैं और शून्य एफआईआर के लिए सिस्टम के कार्यान्वयन से मुद्दों को हल करने में मदद मिलेगी.
पूर्व रेल मंत्रियों के कार्यकाल से की तुलना
इससे पहले भी रेल मंत्री ने राज्यसभा में 17 मार्च को लालू यादव और ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा था कि रेल मंत्री के रूप में ममता बनर्जी और लालू यादव के कार्यकाल के दौरान हर दिन औसतन एक और दो दुर्घटनाएं होती थी या पटरी से ट्रेन उतरती थी.
रेल मंत्रालय के कामकाज पर बहस का जवाब देते हुए वैष्णव ने कहा कि 2005-06 में, जब राजद सुप्रीमो लालू यादव के हाथ में रेलवे था तब 698 दुर्घटनाएं और पटरी से ट्रेन के उतरने की घटनाएं हुईं. साथ ही उन्होंने आगे कहा, टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी के कार्यकाल के दौरान 395 दुर्घटनाएं और रेल के पटरी से उतरने की घटनाएं हुईं और जब कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खरगे रेल मंत्री थे, तब दुर्घटनाओं और पटरी से रेल उतरने की संख्या 38 थी.
अपनी सरकार की कामयाबी गिनाते हुए उन्होंने कहा था कि जहां कभी प्रतिदिन औसतन एक दुर्घटना होती थी, आज यह संख्या प्रति वर्ष मात्र 30 दुर्घटनाएं रह गई है. यहां तक कि अगर हम 43 ट्रेन के पटरी से उतरने की घटनाओं को भी शामिल कर लें, तो कुल संख्या 73 होती है. इसका मतलब है कि यह संख्या, जो पहले 700 के आसपास थी, अब 80 से भी कम हो गई है, जो 90% की कमी है.

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